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Sunday, 22 February 2026

जीण माता की यात्रा SCRIPT FOR DOCUMENTRY FILM writer and research director HARI OM JOSHI

Script and research director HARI OM JOSHI.
Script for documentry film on 
JEEN MATA  SHEKHAWATI TEERTH 

"जीण माता का इतिहास लगभग 1000-1200 वर्ष पुराना है, जो चौहान वंश की कुलदेवी के रूप में पूजी जाती हैं। 
चूरू के घांघू गांव में जन्मी 'जीण बाई' ने सीकर की काजल शिखर पहाड़ियों पर तपस्या कर शक्ति का रूप धारण किया था। 
औरंगजेब की सेना द्वारा मंदिर तोड़ने के प्रयास के दौरान माता द्वारा मधुमक्खियों के रूप में चमत्कार दिखाए जाने की लोक कथा प्रसिद्ध है। 
 जीण माता के इतिहास की मुख्य बातें: उत्पत्ति और परिवार: जीण माता का जन्म एक राजपूत परिवार में हुआ था।
 उनके भाई का नाम हर्ष था, जिन्हें भैरव का अवतार माना जाता है। 
तपस्या और सिद्धपीठ: लोक मान्यताओं के अनुसार, भाई-भाभी में विवाद के बाद जीण ने घर त्याग दिया और काजल शिखर पर घोर तपस्या की, जिससे वे देवी रूप में प्रतिष्ठित हुईं। 
औरंगजेब से जुड़ी कथा: जब मुगल बादशाह औरंगजेब ने मंदिर तोड़ने का प्रयास किया, तो माता ने मधुमक्खियों का रूप धारण कर सेना को भगा दिया। 
औरंगजेब ने माता की शक्ति के आगे नतमस्तक होकर माफी मांगी और दिल्ली से अखंड ज्योत के लिए तेल भेजने का वादा किया, जो आज भी जारी है।
 अखंड ज्योत: मंदिर में हज़ारों सालों से अखंड ज्योत जल रही है।
 स्थान और मान्यता: यह मंदिर राजस्थान के सीकर जिले  के रेवासा गांव के पास पहाड़ियों में स्थित है।
जयपुर से बीकानेर हायवे मार्ग उन्हें चौहान, शेखावत और कई अन्य समुदायों की कुलदेवी माना जाता है। विशेषता: मंदिर के गर्भगृह में आठ भुजाओं वाली महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमा है। स्थानीय लोग इन्हें 'भंवरों वाली माता' के नाम से भी जानते हैं।

ChatGPT said:

🎬 डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म स्क्रिप्ट

“शक्ति, श्रद्धा और चमत्कार — की अमर गाथा”


🎵 प्रस्तावना (ओपनिंग सीन)

(हल्का भक्ति संगीत, पहाड़ियों और जंगलों के दृश्य)

वॉइस ओवर:
राजस्थान की पावन धरती…
जहाँ हर कण में इतिहास बसता है…
जहाँ आस्था और शक्ति का संगम होता है…
आज हम आपको ले चलेंगे एक ऐसी देवी के धाम में,
जहाँ चमत्कार, तपस्या और श्रद्धा की अमर कहानी छिपी है…
यह है — जीण माता का दिव्य धाम।


📜 अध्याय 1: उत्पत्ति और इतिहास

(पुराने चित्र, गांव और ग्रामीण जीवन के दृश्य)

वॉइस ओवर:- 


लगभग एक हजार से बारह सौ वर्ष पहले,
चूरू जिले के घांघू गांव में
एक राजपूत परिवार में जन्म हुआ एक कन्या का —
जिसे लोग प्रेम से जीण बाई कहते थे।

वे चौहान वंश की कुलदेवी बनीं
और समय के साथ
शेखावत तथा अनेक समुदायों की आस्था का केंद्र बन गईं।

उनके भाई हर्ष को
भैरव का अवतार माना जाता है,
जो माता की शक्ति के रक्षक थे।


🧘‍♀️ अध्याय 2: तपस्या और देवी स्वरूप

(काजल शिखर पहाड़ियों, ध्यान और प्रकृति के दृश्य)

वॉइस ओवर:
लोक मान्यताओं के अनुसार,
एक पारिवारिक विवाद के बाद
जीण बाई ने गृह त्याग किया।

वे सीकर की काजल शिखर पहाड़ियों पर पहुँचीं
और वहाँ घोर तपस्या में लीन हो गईं।

वर्षों की साधना,
त्याग और समर्पण के बाद,
उन्होंने देवी का स्वरूप धारण किया।

यहीं से यह स्थान
एक सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध हुआ।


⚔️ अध्याय 3: औरंगजेब से जुड़ी चमत्कारी कथा

(नाटकीय बैकग्राउंड म्यूज़िक, पुरानी पेंटिंग्स के दृश्य)

वॉइस ओवर:
इतिहास के पन्नों में दर्ज है
एक अद्भुत कथा…

जब मुगल शासक औरंगजेब की सेना
इस मंदिर को तोड़ने पहुँची,
तब माता ने अपनी दिव्य शक्ति प्रकट की।

हज़ारों मधुमक्खियों का रूप धारण कर
माता ने सेना पर आक्रमण कर दिया।

डर और विस्मय से भरकर
सेना पीछे हट गई।

औरंगजेब ने माता की शक्ति को स्वीकार किया,
माफी मांगी
और दिल्ली से अखंड ज्योत के लिए
तेल भेजने का वचन दिया।

यह परंपरा आज भी जारी है।


🪔 अध्याय 4: अखंड ज्योत — अमर आस्था का प्रतीक

(दीपक, मंदिर के अंदरूनी दृश्य)

वॉइस ओवर:
जीण माता मंदिर में
हज़ारों वर्षों से
एक अखंड ज्योत जल रही है।

यह ज्योत केवल दीपक नहीं,
बल्कि भक्तों की अटूट श्रद्धा का प्रतीक है।

यह बताती है कि
आस्था कभी बुझती नहीं।


🗺️ अध्याय 5: स्थान और धार्मिक मान्यता

(ड्रोन शॉट, पहाड़, जंगल, श्रद्धालु)

वॉइस ओवर:
यह पवित्र मंदिर
राजस्थान के सीकर जिले में
रेवासा गांव के पास
घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित है।

यह स्थान
शक्ति उपासकों के लिए
एक प्रमुख तीर्थस्थल है।

नवरात्रि और मेलों में
लाखों श्रद्धालु
यहाँ दर्शन करने आते हैं।


🛕 अध्याय 6: मंदिर की विशेषताएँ

(गर्भगृह, प्रतिमा के दृश्य)

वॉइस ओवर:
मंदिर के गर्भगृह में
आठ भुजाओं वाली
महिषासुर मर्दिनी की भव्य प्रतिमा विराजमान है।

माता का यह रूप
असुरों पर विजय और
धर्म की रक्षा का प्रतीक है।

स्थानीय लोग
उन्हें प्रेम से
“भंवरों वाली माता” भी कहते हैं।


🌸 अध्याय 7: भक्तों की आस्था

(भक्तों की प्रार्थना, नारियल, धूप-दीप)

वॉइस ओवर:
यहाँ आने वाला हर भक्त
अपनी मनोकामनाएँ लेकर आता है।

कोई संतान की कामना करता है,
कोई सफलता की,
तो कोई शांति की तलाश में आता है।

माना जाता है कि
सच्चे मन से मांगी गई प्रार्थना
माता अवश्य पूरी करती हैं।


🌅 समापन (क्लोज़िंग सीन)

(सूर्यास्त, मंदिर की आरती, घंटियों की आवाज़)

वॉइस ओवर:
जीण माता केवल एक मंदिर नहीं,
बल्कि विश्वास, शक्ति और संस्कृति का प्रतीक हैं।

यहाँ इतिहास बोलता है,
आस्था मुस्कुराती है
और चमत्कार आज भी जीवित हैं।

माता जीण भवानी की कृपा
हम सभी पर बनी रहे…

जय जीण माता! 🙏


Thursday, 12 February 2026

सपनों की उड़ान


यहाँ “मस्ती की पाठशाला” पर आधारित एक दिलचस्प और भावनात्मक फिल्म कहानी प्रस्तुत है:


🎬 फिल्म का नाम:

“मस्ती की पाठशाला – सपनों की उड़ान”


टाइटल गीत:-

मुखड़ा)
कच्ची बस्ती से निकले सपने,
नीले गगन को छूने चले,
नंगे पाँव पर हिम्मत भारी,
आँखों में सूरज, दिल में उजाले।
मस्ती की पाठशाला है ये,
ख़्वाबों का ये कारवां,
टूटी छत में पलते तारे,
लिखते नई पहचान।
(कोरस)
मस्ती की पाठशाला…
जीने का ये पैगाम,
हर बच्चे के होंठों पर
हँसी, उम्मीद, अरमान।
मस्ती की पाठशाला…
रोशनी का ये जहान,
आज की ये छोटी कली
कल बनेगी आसमान।

(अंतरा 1)
फटे बस्तों में भरे खजाने,
कल की चमकती तस्वीरें,
टूटी स्लेट पर लिखे इरादे,
किस्मत बदलने की तहरीरें।
भूखे पेट में सपनों की आग,
थके नहीं ये पंख कभी,
अंधियारी गलियों से उठकर
चाँद को छूने की ज़िद लगी।
(कोरस)
मस्ती की पाठशाला…
सपनों की ये दुकान,
जहाँ बिकती नहीं मजबूरी
बस मिलती है उड़ान।

(अंतरा 2)
माँ की लोरी, पापा की मेहनत,
गुरुजी का विश्वास,
इन सबकी ताक़त से बनता
हर बच्चे का इतिहास।
आँसू पोछकर हँसना सीखा,
हार से लड़ना जाना,
कच्चे घर के इन दीयों ने
सीखा है जगमगाना।

(ब्रिज)
ना दौलत का घमंड यहाँ,
ना शोहरत का भार,
बस मेहनत, सच्चाई और
सपनों की सरकार।

(मुखड़ा – रिप्राइज)
कच्ची बस्ती से निकले सपने,
आसमान को रंगेंगे आज,
मस्ती की पाठशाला से निकले
भारत के नए सरताज।

(आउट्रो)
मस्ती की पाठशाला…
कल का उजला नाम,
हर बच्चे की कहानी बने
देश की पहचान…
मस्ती की पाठशाला… 

📖 कहानी:

जयपुर की तंग गलियों और झुग्गी-झोपड़ियों के बीच बसी है “मस्ती की पाठशाला” — एक छोटी-सी जगह, जहाँ बड़े सपने पलते हैं।
यहाँ हर दिन स्लम्स के बच्चे आते हैं — नंगे पाँव, फटे कपड़ों में, लेकिन आँखों में चमक लिए।

इस पाठशाला को चलाते हैं —
अनुज श्रीवास्तव और श्रीमती मिनाक्षी श्रीवास्तव,
जो बच्चों के लिए शिक्षक ही नहीं, माँ-बाप जैसे हैं।

यहाँ बच्चों को मुफ्त शिक्षा और मुफ्त भोजन मिलता है।


🌈 शुरुआत

फिल्म की शुरुआत होती है सुबह की धूप से।

बच्चे दौड़ते हुए आते हैं—

“आज क्या बनेगा मैडम?”
“आज कौन-सा खेल होगा सर?”

मिनाक्षी मुस्कुराकर कहती हैं—

“आज पढ़ाई के साथ मज़ा भी होगा।”

अनुज सर एक घोषणा करते हैं—

“इस महीने हम एक ‘सपनों की प्रतियोगिता’ करेंगे।”

सब चौंक जाते हैं।


🎯 टास्क (Challenge)

बच्चों को तीन बड़े टास्क दिए जाते हैं:

1️⃣ टास्क 1: “मेरा सपना”

हर बच्चा बताएगा कि वह बड़ा होकर क्या बनना चाहता है।

  • कोई डॉक्टर बनना चाहता है

  • कोई पुलिस

  • कोई टीचर

  • कोई गायक

बच्चे पहली बार अपने सपनों को ज़ुबान देते हैं।


2️⃣ टास्क 2: “मेरी मेहनत”

हर बच्चा रोज़:

✔ समय पर आएगा
✔ होमवर्क करेगा
✔ किसी एक बच्चे की मदद करेगा

यह टास्क सबसे मुश्किल होता है।

क्योंकि—

  • किसी को काम करना पड़ता है

  • किसी के घर में बीमार माँ है

  • किसी के पास कॉपी नहीं है

लेकिन वे हार नहीं मानते।


3️⃣ टास्क 3: “हम बदलेंगे अपनी बस्ती”

बच्चों को अपनी झुग्गी बस्ती में जाकर:

✔ सफाई करनी है
✔ लोगों को पढ़ाई का महत्व समझाना है
✔ छोटे बच्चों को पढ़ाना है

अब बच्चे “सीखने वाले” से “सिखाने वाले” बन जाते हैं।


⚡ चुनौतियाँ

कहानी में मुश्किलें भी आती हैं—

🔴 एक दिन राशन खत्म हो जाता है
🔴 कुछ बच्चे काम पर भेज दिए जाते हैं
🔴 बारिश में छत टपकने लगती है
🔴 कुछ लोग पाठशाला बंद कराने की कोशिश करते हैं

एक बच्चा रोते हुए कहता है—

“सर, क्या अब हमें पढ़ने नहीं मिलेगा?”

अनुज भावुक होकर कहते हैं—

“जब तक हम ज़िंदा हैं, ये पाठशाला बंद नहीं होगी।”


🌟 संघर्ष और जीत

मिनाक्षी अपने गहने बेच देती हैं।
अनुज दोस्तों से मदद मांगते हैं।

धीरे-धीरे लोग जुड़ते हैं।
दान आने लगता है।
स्कूल फिर से चमक उठता है।

बच्चे मिलकर एक छोटा सा कार्यक्रम करते हैं।

वहाँ वे अपने सपने मंच पर दिखाते हैं।


🏆 क्लाइमैक्स (अंत)

प्रतियोगिता का अंतिम दिन।

सब बच्चे मंच पर खड़े हैं।

एक बच्चा बोलता है—

“पहले हम सिर्फ झुग्गी में रहते थे…
आज हमारे सपने आसमान में रहते हैं।”

सबकी आँखें नम हो जाती हैं।

अनुज और मिनाक्षी गर्व से देखते हैं।

अंत में लिखा आता है—

“मस्ती की पाठशाला — जहाँ गरीबी नहीं, सपने पढ़ाए जाते हैं।”


❤️ संदेश (Message)

यह फिल्म बताती है कि—

✔ सही मार्गदर्शन
✔ प्यार
✔ मेहनत

से कोई भी बच्चा अपनी किस्मत बदल सकता है

Friday, 2 January 2026

गणपति तुम्हें प्रणाम गीत संगीत हरिओम जोशी

गीतकार संगीतकार हरिओम जोशी 
BOON WORLD OF MUSIC 
JHALAWAR RAJASTHAN 

गौरी के पुत्र हो तुम शिव के सुख रूप हों तुम 
तीनों लोकों में तेरा नाम 
गणपति तुम्हें प्रणाम प्रणाम देवा गणपति तुम्हें प्रणाम 
१.हे अविनाशी जय सुख राशी।
कष्ट हरे तेरा नाम -२
गणपति तुम्हें प्रणाम प्रणाम देवा गणपति तुम्हें प्रणाम 

२. प्रथम पूज्य है नाम तुम्हारा 
सिद्धिविनायक धाम तुम्हारा 
मोदक प्रिय सुख धाम 
गणपति तुम्हें प्रणाम प्रणाम देवा गणपति तुम्हें प्रणाम 

३ ऋद्धि सिद्धि हैं तव अर्धांगी 
   अष्टविनायक  गण गोरांगी 
    सफल करो सब काम 
     गणपति तुम्हें प्रणाम प्रणाम देवा गणपति तुम्हें प्रणाम 

Thursday, 1 January 2026

आरंभिक संगीत अभ्यास के स्वर अलंकार ::-

                     " भारतीय संगीत "
सा 
सा रे सा ।
सा रे ग रे सा ।
सा रे ग म‌‌‌ ग रे सा ।
सा रे ग म‌‌‌ प म ग रे सा ।
सा रे ग म प ध प म ग रे सा।
सा रे ग म प ध नी ध प म ग रे सा।
सा रे ग म प ध नी सां नी ध प म ग रे सा।
__________________________________________"":-  आरंभिक संगीत के अभ्यास हेतु निम्नलिखित स्वरों के अलंकार ।
_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-
::::::::::::::::::::::::::"अलंकार"::::::::::::::::::::::::::::
                        :-  एक -:

आरोह : सा , रे , ग  म  प  ध  नी  सां ।
अवरोह :-  सां  नी  ध  प  म  ग  रे  सा  ।।
                        :-   दो -:
आरोह :-  सासा  रेरे  गग  मम  पप  धध  नीनी सांसां ।
अवरोह :- सांसां नीनी धध पप मम गग रेरे सासा ।।
                        :- तीन -:
आरोह :- सासासा रेरेरे गगग ममम पपप धधध नीनीनी
              सांसांसां ।
अवरोह :- सांसांसां  नीनीनी धधध पपप ममम गगग
               रेरेरे सासासा ।।
                         :- चार -:
आरोह :- सासासासा रेरेरेरे गगगग मममम पपपप
              धधधध नीनीनीनी सांसांसांसां ।
अवरोह :- सांसांसांसां नीनीनीनी धधधध पपपप मममम
              गगगग रेरेरेरे सासासासा ।।
                        :- पांच -:
आरोह :- सारेसा रेगरे गमग मपम पधप धनीध निसांनि
              सांरेंसां ।
अवरोह :- सांरेंसां नीसांनी धनीध पधप मपम गमग रेगरे
               सारेसा ।।
                       :- छः -:
आरोह :-  सासारेरेसासा रेरेगगरेरे गगममगग ममपपमम
              पपधधपप धधनीनीधध नीनीसांसांनीनी
              सांसांरेंरेंसांसां ।
अवरोह :- सांसांरेंरेंसांसां नीनीसांसांनीनी धधनीनीधध
              पपधधपप ममपपमम गगममगग रेरेगगरेरे
              सासारेरेसासा ।।
                          :- सात -:
आरोह :- सारेगरेसा रेगमगरे गमपमग मपधपम पधनीधप धनीसांनीध नीसांरेंसांनी सांरेंगंरेसां ।
अवरोह :- सांरेंगंरेंसां नीसांरेंसांनी धनीसांनीध पधनीधप
              मपधपम गमपमग रेगमगरे सारेगरेसा ।।
                         :- आठ -:
आरोह :- सारेगमगरेसा रेगमपमगरे गमपधपमग
मपधनीधपम पधनीसांनीधप धनीसांरेंसांनीध नीसांरेंगंरेंसानी सांरेंगंमंगंरेंसां ।
अवरोह :- सांरेंगंमंगंरेंसां नीसांरेंगंरेंसांनी धनीसांरेंसांनीध
पधनीसांनीधप मपधनीधपम गमपधपमग रेगमपमगरे सारेगमगरेसा ।।
                      :- नौ -:
आरोह :- सारेग रेगम गमप मपध पधनी धनीसां ।
अवरोह :- सांनीध नीधप धपम पमग मगरे गरेसा ।।
                     :- दस -:
आरोह :-  सारेगम , रेगमप गमपध मपधनी पधनीसां ।
अवरोह :- सांनीधप नीधपम धपमग पमगरे मगरेसा ।।
                  :- ग्यारह -:
आरोह :- सारेगमप रेगमपध गमपधनी मपधनीसां ।
अवरोह :- सांनीधपम नीधपमग धपमगरे पमगरेसा ।।
                       :-  बारह -:
आरोह :- सारे  रेग  गम  मप पध धनी  नीसां ।
अवरोह :-  सांनी नीध धप पम मग गरे रेसा ।।
                        :- तेरह-:
आरोह :- साग रेम गप मध पनी धसां ।
अवरोह :- सांध नीप धम पग मरे गसा ।।
                        :- चौदह -:
आरोह :- सारेसारेग  रेगरेगम गमगमप मपमपध पधपधनी धनीधनीसां ।
अवरोह :- सांनीसांनीध नीधनीधप धपधपम पमपमग मगमगरे गरेगरेसा ।।
                     :- पंद्रह -:
आरोह :- सारेसारेगम रेगरेगमप गमगमपध मपमपधनी
             पधपधनीसां ।
अवरोह :- सांनीसांनीधप नीधनीधपम धपधपमग        पमपमगरे मगमगरेसा ।।
                     :-सोलह -:
आरोह :- सारेसारेसारेग रेगरेगरेगम  गमगमगमप मपमपमपध पधपधपधनी धनीधनीधनीसां ।
अवरोह :-
सांनीसांनीसांनीध नीधनीधनीधप धपधपधपम पमपमपमग मगमगमगरे गरेगरेगरेसा ।।
                       :- सत्रह -:
आरोह :- सारेगमपध रेगमपधनी गमपधनीसां ।
अवरोह :- सांनीधपमग नीधपमगरे धपमगरेसा ।।
                     :- अठारह -:
आरोह :- सासाग रेरेम गगप ममध पपनी धधसां ।
अवरोह :- सांसांध नीनीप धधम पपग ममरे गगसा ।।
                    :- उन्नीस -:
आरोह :- सासागग रेरेमम गगपप ममधध पपनीनी
             धधसांसां ।
अवरोह :- सांसांधध नीनीपप धधमम पपगग ममरेरे
              गगसासा ।।
ःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःः
उपरोक्त सभी अलंकार  शुद्ध स्वरों में नीहित हैं । नियमित अभ्यास आप गायन अथवा किसी भी वाद्य पर करके स्वर ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं
ःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःः

Friday, 26 December 2025

प्रणय निवेदन राजस्थानी गीत । गीत संगीत : हरिओम जोशी.

प्रेमिका 
म्हारी आखडल्यां री कोर ,
 लागी बलमजी थारी ओर।
म्हने , काईं थे तरसाओ रे।
 राज म्हारी मांग सजावो रे।
कांई तो तरसाओ ढोला कांई तरसाओ रे 
प्रेमी
थोड़ी धीमी फेंको डोर
माली हालत छे कमजोर
रोजी रोटी ने जुटाऊं ये 
गौरी मांग भी सजादेऊंलो ये ।।
घणा सुहावना सपणा देख्या 
सतरंगी गणगौर।
बणी छूं थारी बीणणी जी
आंखडल्यां री कोर 
थारी सुहागण मैं कहलाऊं रे 
म्हाने कांईं तरसाओ रे 





Sunday, 21 December 2025

राजस्थानी पहेली गीत गीतकार संगीतकार हरिओम।

विवाह गीत।
दुल्हन की सखियां और बारातियों के बीच चटपटी छेड़छाड़ भरा राजस्थानी महक भरा राजस्थानी पहेली गीत। Lyricist and music composer Hari Om Joshi.
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सवाल सखियों द्वारा
१. ओ दूल्हा रा साथिया म्हारी बूझो बात,
    पहली बारां सासरिये में दूल्हो कांई मारे।।
जवाब बरातियों द्वारा
१. दुल्हन की नटखट सखियां या कांई पूछी बात,
    पहली बारां सासरिये में दूल्हो तोरण मारे।।
सवाल सखियों द्वारा
२. मने बताओ तो मैं जाणूं पूछूं में जो बात
    पाछे पाछे दूल्हा रे सांगे  कांई चाले ।।
जवाब बरातियों द्वारा
२. इत्ती सी कंई बात पूछी सुंदर मुखड़ा वाली,
    पाछे पाछे दूल्हा रे दुल्हन सागे चाले।।
सवाल सखियों द्वारा
३. छील चामडो उघाड़ो चमके लाल क़तार
     मोती जडियां खाजाओ खोलखोल सिणगार।।
जवाब बरातियों द्वाराl
३. लाल सुरख होठांं वाली, चोखी पूछी बात
    दाड़म ने खाया करे खोलखोल सिणगार।।
सवाल सखियों द्वारा
४.छोटी सी दो कोटड्यां लपलप करे किवाड़,
जीं रे मायने झांकतां आशिक होवे यार
जवाब बरातियों द्वारा
४. आपां दोन्यां मल जावां हो जागो उद्धार,
     आजा म्हारी लारां गौरी करल्यां आख्या चार।।
सवाल सखियों द्वारा
५. हरिया ने छोडे नहीं सूखा भी ले चाख
    बैद भी बताया करे या हाजमा री साख ।।
जवाब बरातियों द्वारा
५. ओ गौरी चितचोरणी तू क्यों मारे आंख।
     आजा म्हारी बायां में तने खिलास्युं दाख।।
सवाल सखियों द्वारा 
६. खुरदरी डाड्यां वारो ठूंठ जियां गाठो
      ऊपर से दीखे लाकडो भीतर जाणे पैठो।।
जवाब बरातियों द्वारा
६. मीठी थारी बात छे गौरी मीठा ही बखान ,
    चटक मले छे मंदिर में, बांटे सतनाराण।।
सवाल सखियों द्वारा 
७. थारा घर री चाकरी करबा वाली कोण,
    कोनो कोनो झांके है वा नखराली कोण।।
जवाब बरातियों द्वारा
७ तू चाले तने मिलास्युं बन म्हारी गणगौर, 
    झाड़ू जिस्यां री चाकरी घर घर में करे रे कोण।।
८. सवाल सखियों द्वारा
     चालुंगी सागे थारे जो सांची बताओ बात,
     पाछे मत भागे तू बींके नी मारेली लात।।
जवाब बरातियों द्वारा ll
८. मूं तो परण चुक्यो गोरी मने तू करदे माफ।
     घर में सगला मारेला गधी मारे लात।।