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Friday, 3 April 2026

BOON ONLINE MUSIC ACADEMY

           BOON ONLINE MUSIC ACADEMY 
SONGS NOTATIONS:- 
SONG NUMBER ONE 
श्री गणेश आरती 
जय गणेश जय गणेश देवा 
सा सा रे रे ग ग ग 
जय ग णे न जय गणेश 
ग ग  ग म ग रे रे 
जय गणेश देवा 
ऩि ऩि सा ऩि रे रे रे ग ग रे सा सा सा सा 
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा 
सा सा ग म प प प  म ऺ  मऺ  प प म म ग 
एक दन्त दया वंत चार भुजा धारी 

आरंभिक संगीत अभ्यास के स्वर अलंकार ::-

                     " भारतीय संगीत "
सा 
सा रे सा ।
सा रे ग रे सा ।
सा रे ग म‌‌‌ ग रे सा ।
सा रे ग म‌‌‌ प म ग रे सा ।
सा रे ग म प ध प म ग रे सा।
सा रे ग म प ध नी ध प म ग रे सा।
सा रे ग म प ध नी सां नी ध प म ग रे सा।
__________________________________________"":-  आरंभिक संगीत के अभ्यास हेतु निम्नलिखित स्वरों के अलंकार ।
_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-
::::::::::::::::::::::::::"अलंकार"::::::::::::::::::::::::::::
                        :-  एक -:

आरोह : सा , रे , ग  म  प  ध  नी  सां ।
अवरोह :-  सां  नी  ध  प  म  ग  रे  सा  ।।
                        :-   दो -:
आरोह :-  सासा  रेरे  गग  मम  पप  धध  नीनी सांसां ।
अवरोह :- सांसां नीनी धध पप मम गग रेरे सासा ।।
                        :- तीन -:
आरोह :- सासासा रेरेरे गगग ममम पपप धधध नीनीनी
              सांसांसां ।
अवरोह :- सांसांसां  नीनीनी धधध पपप ममम गगग
               रेरेरे सासासा ।।
                         :- चार -:
आरोह :- सासासासा रेरेरेरे गगगग मममम पपपप
              धधधध नीनीनीनी सांसांसांसां ।
अवरोह :- सांसांसांसां नीनीनीनी धधधध पपपप मममम
              गगगग रेरेरेरे सासासासा ।।
                        :- पांच -:
आरोह :- सारेसा रेगरे गमग मपम पधप धनीध निसांनि
              सांरेंसां ।
अवरोह :- सांरेंसां नीसांनी धनीध पधप मपम गमग रेगरे
               सारेसा ।।
                       :- छः -:
आरोह :-  सासारेरेसासा रेरेगगरेरे गगममगग ममपपमम
              पपधधपप धधनीनीधध नीनीसांसांनीनी
              सांसांरेंरेंसांसां ।
अवरोह :- सांसांरेंरेंसांसां नीनीसांसांनीनी धधनीनीधध
              पपधधपप ममपपमम गगममगग रेरेगगरेरे
              सासारेरेसासा ।।
                          :- सात -:
आरोह :- सारेगरेसा रेगमगरे गमपमग मपधपम पधनीधप धनीसांनीध नीसांरेंसांनी सांरेंगंरेसां ।
अवरोह :- सांरेंगंरेंसां नीसांरेंसांनी धनीसांनीध पधनीधप
              मपधपम गमपमग रेगमगरे सारेगरेसा ।।
                         :- आठ -:
आरोह :- सारेगमगरेसा रेगमपमगरे गमपधपमग
मपधनीधपम पधनीसांनीधप धनीसांरेंसांनीध नीसांरेंगंरेंसानी सांरेंगंमंगंरेंसां ।
अवरोह :- सांरेंगंमंगंरेंसां नीसांरेंगंरेंसांनी धनीसांरेंसांनीध
पधनीसांनीधप मपधनीधपम गमपधपमग रेगमपमगरे सारेगमगरेसा ।।
                      :- नौ -:
आरोह :- सारेग रेगम गमप मपध पधनी धनीसां ।
अवरोह :- सांनीध नीधप धपम पमग मगरे गरेसा ।।
                     :- दस -:
आरोह :-  सारेगम , रेगमप गमपध मपधनी पधनीसां ।
अवरोह :- सांनीधप नीधपम धपमग पमगरे मगरेसा ।।
                  :- ग्यारह -:
आरोह :- सारेगमप रेगमपध गमपधनी मपधनीसां ।
अवरोह :- सांनीधपम नीधपमग धपमगरे पमगरेसा ।।
                       :-  बारह -:
आरोह :- सारे  रेग  गम  मप पध धनी  नीसां ।
अवरोह :-  सांनी नीध धप पम मग गरे रेसा ।।
                        :- तेरह-:
आरोह :- साग रेम गप मध पनी धसां ।
अवरोह :- सांध नीप धम पग मरे गसा ।।
                        :- चौदह -:
आरोह :- सारेसारेग  रेगरेगम गमगमप मपमपध पधपधनी धनीधनीसां ।
अवरोह :- सांनीसांनीध नीधनीधप धपधपम पमपमग मगमगरे गरेगरेसा ।।
                     :- पंद्रह -:
आरोह :- सारेसारेगम रेगरेगमप गमगमपध मपमपधनी
             पधपधनीसां ।
अवरोह :- सांनीसांनीधप नीधनीधपम धपधपमग        पमपमगरे मगमगरेसा ।।
                     :-सोलह -:
आरोह :- सारेसारेसारेग रेगरेगरेगम  गमगमगमप मपमपमपध पधपधपधनी धनीधनीधनीसां ।
अवरोह :-
सांनीसांनीसांनीध नीधनीधनीधप धपधपधपम पमपमपमग मगमगमगरे गरेगरेगरेसा ।।
                       :- सत्रह -:
आरोह :- सारेगमपध रेगमपधनी गमपधनीसां ।
अवरोह :- सांनीधपमग नीधपमगरे धपमगरेसा ।।
                     :- अठारह -:
आरोह :- सासाग रेरेम गगप ममध पपनी धधसां ।
अवरोह :- सांसांध नीनीप धधम पपग ममरे गगसा ।।
                    :- उन्नीस -:
आरोह :- सासागग रेरेमम गगपप ममधध पपनीनी
             धधसांसां ।
अवरोह :- सांसांधध नीनीपप धधमम पपगग ममरेरे
              गगसासा ।।
                          ::- 
ःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःः
उपरोक्त सभी अलंकार  शुद्ध स्वरों में नीहित हैं । नियमित अभ्यास आप गायन अथवा किसी भी वाद्य पर करके स्वर ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं
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Thursday, 26 March 2026

welcome song lyrics and music Hari Om Joshi

Welcome song.in Hindi 
SWAGTAM SHUBH SWAGTAM 
SWAGTAM SHUBH SWAGTAM 
NAV-VARSH MANGAL DAYAKAM 
SWAGTAM SHUBH SWAGTAM 

SHUBH VRATAM KRIT LAKSHYAKAM 
SHRI SIDDHI VIDYA DAYAKAM 
SWAGTAM SHUBH SWAGTAM 

SWAGTAM SHUBH SWAGTAM 
SWAGTAM SHUBH SWAGTAM 
ANAND MANGAL MODKAM .

SWAGTAM SHUBH SWAGTAM 
SWAGTAM SHUBH SWAGTAM 

:-;:-;:-;:-;:-;:-;:-;:-;:-;:-;:-;:-;:-;:-;:-;:-;:-;

स्वागतम् शुभ स्वागतम् -२ 
नववर्ष मंगल दायकम्।। _२ 

शुभ व्रतम् कृत लक्ष्यकम् -२ 
श्री सिद्धि विद्या दायकम् -२ 


स्वागतम् शुभ स्वागतम् -२ 
आनंद मंगल मोदकम् -२ 

स्वागतम् शुभ स्वागतम् -३ 

Wednesday, 25 March 2026

ईश्वर तुम्हीं दया।

ईश्वर तुम्हीं दया करो, 
तुम बिन हमरा कौन है ।
दुर्बलता दीनता हरो 
तुम बिन हमारा कौन है।।

माता तुम्हीं  तुम्हीं पिता ,
बंधु तुम्हीं  तुम्हीं सखा ।
केवल तुम्हारा आसरा 
तुम बिन हमारा कौन है 

जग को रचाने वाले तुम 
सबको मिटाने वाले तुम 
सृष्टि  रचाने वाले तुम 
तुम बिन हमारा  कौन है 

तेरी ये ज़मीं है । गीतकार संगीतकार हरिओम जोशी

              "ईश्वर एक रूप अनेक "

गीतकार संगीतकार हरिओम जोशी 

ॐ ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

        तेरी ही ज़मीं है । तेरा आसमाँ  है ।
        तुझसे ही दुनिया का चलता कारवाँ है ।।

     * . तू बनाता है तू ही छीन लेता है ।

        तेरी बरक़तों से ही चलता आशियाँ है ।।

       तू ही रहनुमा है मेरा  तू मेरा जहान है  ।
        तुझमें ही हरशय है । तू ही बाग़वां है ।।
  
        कोई कहे तुझको खुदा कोई शिव राम कहे ।
         कोई जीसस बोले कोहीं वाहे गुरू का जहाँ ।।

      *. तेरा दर मंदिर है । तेरा दर काबा है ।
        गिरजेघर में ग़र तू । तेरा गुरुद्वारा है ।।

::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::

      गीतकार संगीतकार हरिओम जोशी ############################

Tuesday, 24 February 2026

श्यामा की बंसी

मोहें प्यारी लागे री मां, या श्यामा की की बंसी।

Sunday, 22 February 2026

जीण माता की यात्रा SCRIPT FOR DOCUMENTRY FILM writer and research director HARI OM JOSHI

Script and research director HARI OM JOSHI.
Script for documentry film on 
JEEN MATA  SHEKHAWATI TEERTH 

"जीण माता का इतिहास लगभग 1000-1200 वर्ष पुराना है, जो चौहान वंश की कुलदेवी के रूप में पूजी जाती हैं। 
चूरू के घांघू गांव में जन्मी 'जीण बाई' ने सीकर की काजल शिखर पहाड़ियों पर तपस्या कर शक्ति का रूप धारण किया था। 
औरंगजेब की सेना द्वारा मंदिर तोड़ने के प्रयास के दौरान माता द्वारा मधुमक्खियों के रूप में चमत्कार दिखाए जाने की लोक कथा प्रसिद्ध है। 
 जीण माता के इतिहास की मुख्य बातें: उत्पत्ति और परिवार: जीण माता का जन्म एक राजपूत परिवार में हुआ था।
 उनके भाई का नाम हर्ष था, जिन्हें भैरव का अवतार माना जाता है। 
तपस्या और सिद्धपीठ: लोक मान्यताओं के अनुसार, भाई-भाभी में विवाद के बाद जीण ने घर त्याग दिया और काजल शिखर पर घोर तपस्या की, जिससे वे देवी रूप में प्रतिष्ठित हुईं। 
औरंगजेब से जुड़ी कथा: जब मुगल बादशाह औरंगजेब ने मंदिर तोड़ने का प्रयास किया, तो माता ने मधुमक्खियों का रूप धारण कर सेना को भगा दिया। 
औरंगजेब ने माता की शक्ति के आगे नतमस्तक होकर माफी मांगी और दिल्ली से अखंड ज्योत के लिए तेल भेजने का वादा किया, जो आज भी जारी है।
 अखंड ज्योत: मंदिर में हज़ारों सालों से अखंड ज्योत जल रही है।
 स्थान और मान्यता: यह मंदिर राजस्थान के सीकर जिले  के रेवासा गांव के पास पहाड़ियों में स्थित है।
जयपुर से बीकानेर हायवे मार्ग उन्हें चौहान, शेखावत और कई अन्य समुदायों की कुलदेवी माना जाता है। विशेषता: मंदिर के गर्भगृह में आठ भुजाओं वाली महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमा है। स्थानीय लोग इन्हें 'भंवरों वाली माता' के नाम से भी जानते हैं।

ChatGPT said:

🎬 डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म स्क्रिप्ट

“शक्ति, श्रद्धा और चमत्कार — की अमर गाथा”


🎵 प्रस्तावना (ओपनिंग सीन)

(हल्का भक्ति संगीत, पहाड़ियों और जंगलों के दृश्य)

वॉइस ओवर:
राजस्थान की पावन धरती…
जहाँ हर कण में इतिहास बसता है…
जहाँ आस्था और शक्ति का संगम होता है…
आज हम आपको ले चलेंगे एक ऐसी देवी के धाम में,
जहाँ चमत्कार, तपस्या और श्रद्धा की अमर कहानी छिपी है…
यह है — जीण माता का दिव्य धाम।


📜 अध्याय 1: उत्पत्ति और इतिहास

(पुराने चित्र, गांव और ग्रामीण जीवन के दृश्य)

वॉइस ओवर:- 


लगभग एक हजार से बारह सौ वर्ष पहले,
चूरू जिले के घांघू गांव में
एक राजपूत परिवार में जन्म हुआ एक कन्या का —
जिसे लोग प्रेम से जीण बाई कहते थे।

वे चौहान वंश की कुलदेवी बनीं
और समय के साथ
शेखावत तथा अनेक समुदायों की आस्था का केंद्र बन गईं।

उनके भाई हर्ष को
भैरव का अवतार माना जाता है,
जो माता की शक्ति के रक्षक थे।


🧘‍♀️ अध्याय 2: तपस्या और देवी स्वरूप

(काजल शिखर पहाड़ियों, ध्यान और प्रकृति के दृश्य)

वॉइस ओवर:
लोक मान्यताओं के अनुसार,
एक पारिवारिक विवाद के बाद
जीण बाई ने गृह त्याग किया।

वे सीकर की काजल शिखर पहाड़ियों पर पहुँचीं
और वहाँ घोर तपस्या में लीन हो गईं।

वर्षों की साधना,
त्याग और समर्पण के बाद,
उन्होंने देवी का स्वरूप धारण किया।

यहीं से यह स्थान
एक सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध हुआ।


⚔️ अध्याय 3: औरंगजेब से जुड़ी चमत्कारी कथा

(नाटकीय बैकग्राउंड म्यूज़िक, पुरानी पेंटिंग्स के दृश्य)

वॉइस ओवर:
इतिहास के पन्नों में दर्ज है
एक अद्भुत कथा…

जब मुगल शासक औरंगजेब की सेना
इस मंदिर को तोड़ने पहुँची,
तब माता ने अपनी दिव्य शक्ति प्रकट की।

हज़ारों मधुमक्खियों का रूप धारण कर
माता ने सेना पर आक्रमण कर दिया।

डर और विस्मय से भरकर
सेना पीछे हट गई।

औरंगजेब ने माता की शक्ति को स्वीकार किया,
माफी मांगी
और दिल्ली से अखंड ज्योत के लिए
तेल भेजने का वचन दिया।

यह परंपरा आज भी जारी है।


🪔 अध्याय 4: अखंड ज्योत — अमर आस्था का प्रतीक

(दीपक, मंदिर के अंदरूनी दृश्य)

वॉइस ओवर:
जीण माता मंदिर में
हज़ारों वर्षों से
एक अखंड ज्योत जल रही है।

यह ज्योत केवल दीपक नहीं,
बल्कि भक्तों की अटूट श्रद्धा का प्रतीक है।

यह बताती है कि
आस्था कभी बुझती नहीं।


🗺️ अध्याय 5: स्थान और धार्मिक मान्यता

(ड्रोन शॉट, पहाड़, जंगल, श्रद्धालु)

वॉइस ओवर:
यह पवित्र मंदिर
राजस्थान के सीकर जिले में
रेवासा गांव के पास
घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित है।

यह स्थान
शक्ति उपासकों के लिए
एक प्रमुख तीर्थस्थल है।

नवरात्रि और मेलों में
लाखों श्रद्धालु
यहाँ दर्शन करने आते हैं।


🛕 अध्याय 6: मंदिर की विशेषताएँ

(गर्भगृह, प्रतिमा के दृश्य)

वॉइस ओवर:
मंदिर के गर्भगृह में
आठ भुजाओं वाली
महिषासुर मर्दिनी की भव्य प्रतिमा विराजमान है।

माता का यह रूप
असुरों पर विजय और
धर्म की रक्षा का प्रतीक है।

स्थानीय लोग
उन्हें प्रेम से
“भंवरों वाली माता” भी कहते हैं।


🌸 अध्याय 7: भक्तों की आस्था

(भक्तों की प्रार्थना, नारियल, धूप-दीप)

वॉइस ओवर:
यहाँ आने वाला हर भक्त
अपनी मनोकामनाएँ लेकर आता है।

कोई संतान की कामना करता है,
कोई सफलता की,
तो कोई शांति की तलाश में आता है।

माना जाता है कि
सच्चे मन से मांगी गई प्रार्थना
माता अवश्य पूरी करती हैं।


🌅 समापन (क्लोज़िंग सीन)

(सूर्यास्त, मंदिर की आरती, घंटियों की आवाज़)

वॉइस ओवर:
जीण माता केवल एक मंदिर नहीं,
बल्कि विश्वास, शक्ति और संस्कृति का प्रतीक हैं।

यहाँ इतिहास बोलता है,
आस्था मुस्कुराती है
और चमत्कार आज भी जीवित हैं।

माता जीण भवानी की कृपा
हम सभी पर बनी रहे…

जय जीण माता! 🙏