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Sunday, 22 February 2026

जीण माता की यात्रा SCRIPT FOR DOCUMENTRY FILM writer and research director HARI OM JOSHI

Script and research director HARI OM JOSHI.
Script for documentry film on 
JEEN MATA  SHEKHAWATI TEERTH 

"जीण माता का इतिहास लगभग 1000-1200 वर्ष पुराना है, जो चौहान वंश की कुलदेवी के रूप में पूजी जाती हैं। 
चूरू के घांघू गांव में जन्मी 'जीण बाई' ने सीकर की काजल शिखर पहाड़ियों पर तपस्या कर शक्ति का रूप धारण किया था। 
औरंगजेब की सेना द्वारा मंदिर तोड़ने के प्रयास के दौरान माता द्वारा मधुमक्खियों के रूप में चमत्कार दिखाए जाने की लोक कथा प्रसिद्ध है। 
 जीण माता के इतिहास की मुख्य बातें: उत्पत्ति और परिवार: जीण माता का जन्म एक राजपूत परिवार में हुआ था।
 उनके भाई का नाम हर्ष था, जिन्हें भैरव का अवतार माना जाता है। 
तपस्या और सिद्धपीठ: लोक मान्यताओं के अनुसार, भाई-भाभी में विवाद के बाद जीण ने घर त्याग दिया और काजल शिखर पर घोर तपस्या की, जिससे वे देवी रूप में प्रतिष्ठित हुईं। 
औरंगजेब से जुड़ी कथा: जब मुगल बादशाह औरंगजेब ने मंदिर तोड़ने का प्रयास किया, तो माता ने मधुमक्खियों का रूप धारण कर सेना को भगा दिया। 
औरंगजेब ने माता की शक्ति के आगे नतमस्तक होकर माफी मांगी और दिल्ली से अखंड ज्योत के लिए तेल भेजने का वादा किया, जो आज भी जारी है।
 अखंड ज्योत: मंदिर में हज़ारों सालों से अखंड ज्योत जल रही है।
 स्थान और मान्यता: यह मंदिर राजस्थान के सीकर जिले  के रेवासा गांव के पास पहाड़ियों में स्थित है।
जयपुर से बीकानेर हायवे मार्ग उन्हें चौहान, शेखावत और कई अन्य समुदायों की कुलदेवी माना जाता है। विशेषता: मंदिर के गर्भगृह में आठ भुजाओं वाली महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमा है। स्थानीय लोग इन्हें 'भंवरों वाली माता' के नाम से भी जानते हैं।

ChatGPT said:

🎬 डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म स्क्रिप्ट

“शक्ति, श्रद्धा और चमत्कार — की अमर गाथा”


🎵 प्रस्तावना (ओपनिंग सीन)

(हल्का भक्ति संगीत, पहाड़ियों और जंगलों के दृश्य)

वॉइस ओवर:
राजस्थान की पावन धरती…
जहाँ हर कण में इतिहास बसता है…
जहाँ आस्था और शक्ति का संगम होता है…
आज हम आपको ले चलेंगे एक ऐसी देवी के धाम में,
जहाँ चमत्कार, तपस्या और श्रद्धा की अमर कहानी छिपी है…
यह है — जीण माता का दिव्य धाम।


📜 अध्याय 1: उत्पत्ति और इतिहास

(पुराने चित्र, गांव और ग्रामीण जीवन के दृश्य)

वॉइस ओवर:- 


लगभग एक हजार से बारह सौ वर्ष पहले,
चूरू जिले के घांघू गांव में
एक राजपूत परिवार में जन्म हुआ एक कन्या का —
जिसे लोग प्रेम से जीण बाई कहते थे।

वे चौहान वंश की कुलदेवी बनीं
और समय के साथ
शेखावत तथा अनेक समुदायों की आस्था का केंद्र बन गईं।

उनके भाई हर्ष को
भैरव का अवतार माना जाता है,
जो माता की शक्ति के रक्षक थे।


🧘‍♀️ अध्याय 2: तपस्या और देवी स्वरूप

(काजल शिखर पहाड़ियों, ध्यान और प्रकृति के दृश्य)

वॉइस ओवर:
लोक मान्यताओं के अनुसार,
एक पारिवारिक विवाद के बाद
जीण बाई ने गृह त्याग किया।

वे सीकर की काजल शिखर पहाड़ियों पर पहुँचीं
और वहाँ घोर तपस्या में लीन हो गईं।

वर्षों की साधना,
त्याग और समर्पण के बाद,
उन्होंने देवी का स्वरूप धारण किया।

यहीं से यह स्थान
एक सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध हुआ।


⚔️ अध्याय 3: औरंगजेब से जुड़ी चमत्कारी कथा

(नाटकीय बैकग्राउंड म्यूज़िक, पुरानी पेंटिंग्स के दृश्य)

वॉइस ओवर:
इतिहास के पन्नों में दर्ज है
एक अद्भुत कथा…

जब मुगल शासक औरंगजेब की सेना
इस मंदिर को तोड़ने पहुँची,
तब माता ने अपनी दिव्य शक्ति प्रकट की।

हज़ारों मधुमक्खियों का रूप धारण कर
माता ने सेना पर आक्रमण कर दिया।

डर और विस्मय से भरकर
सेना पीछे हट गई।

औरंगजेब ने माता की शक्ति को स्वीकार किया,
माफी मांगी
और दिल्ली से अखंड ज्योत के लिए
तेल भेजने का वचन दिया।

यह परंपरा आज भी जारी है।


🪔 अध्याय 4: अखंड ज्योत — अमर आस्था का प्रतीक

(दीपक, मंदिर के अंदरूनी दृश्य)

वॉइस ओवर:
जीण माता मंदिर में
हज़ारों वर्षों से
एक अखंड ज्योत जल रही है।

यह ज्योत केवल दीपक नहीं,
बल्कि भक्तों की अटूट श्रद्धा का प्रतीक है।

यह बताती है कि
आस्था कभी बुझती नहीं।


🗺️ अध्याय 5: स्थान और धार्मिक मान्यता

(ड्रोन शॉट, पहाड़, जंगल, श्रद्धालु)

वॉइस ओवर:
यह पवित्र मंदिर
राजस्थान के सीकर जिले में
रेवासा गांव के पास
घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित है।

यह स्थान
शक्ति उपासकों के लिए
एक प्रमुख तीर्थस्थल है।

नवरात्रि और मेलों में
लाखों श्रद्धालु
यहाँ दर्शन करने आते हैं।


🛕 अध्याय 6: मंदिर की विशेषताएँ

(गर्भगृह, प्रतिमा के दृश्य)

वॉइस ओवर:
मंदिर के गर्भगृह में
आठ भुजाओं वाली
महिषासुर मर्दिनी की भव्य प्रतिमा विराजमान है।

माता का यह रूप
असुरों पर विजय और
धर्म की रक्षा का प्रतीक है।

स्थानीय लोग
उन्हें प्रेम से
“भंवरों वाली माता” भी कहते हैं।


🌸 अध्याय 7: भक्तों की आस्था

(भक्तों की प्रार्थना, नारियल, धूप-दीप)

वॉइस ओवर:
यहाँ आने वाला हर भक्त
अपनी मनोकामनाएँ लेकर आता है।

कोई संतान की कामना करता है,
कोई सफलता की,
तो कोई शांति की तलाश में आता है।

माना जाता है कि
सच्चे मन से मांगी गई प्रार्थना
माता अवश्य पूरी करती हैं।


🌅 समापन (क्लोज़िंग सीन)

(सूर्यास्त, मंदिर की आरती, घंटियों की आवाज़)

वॉइस ओवर:
जीण माता केवल एक मंदिर नहीं,
बल्कि विश्वास, शक्ति और संस्कृति का प्रतीक हैं।

यहाँ इतिहास बोलता है,
आस्था मुस्कुराती है
और चमत्कार आज भी जीवित हैं।

माता जीण भवानी की कृपा
हम सभी पर बनी रहे…

जय जीण माता! 🙏


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