पुलिस का आरोप यह है कि तफ्तीश के दौरान मुलजिम का मोबाइल नंबर मोका ए वारदात पर एक्टिव पाया गया था और इसके आधार पर गिरफ्तार कर अदालत में तय सबूत के बिना पर पेश किया गया है।
वकील ए सफाई ने अपने मुवक्किल को बचाने के लिए बताया कि पुलिस जिस मोबाइल नंबर का हवाला देकर सम्मानित नागरिक को दोषी करार कर गिरफ्तार कर अदालत में लाई है उसका वह मोबाइल नंबर बेशक एक साल तक था और मोबाइल नेटवर्क कंपनी ने रिचार्ज नहीं करने पर स्वत: ही इनकमिंग और आउटगोइंग सेवाएं बंद कर दी थी। यही नहीं इस नंबर को किसी अन्य यूजर्स को बेच दिया
ऐसे में पुलिस का केस निराधार है और इसके लिए पुलिस प्रशासन जिम्मेदार है कि किसी सम्माननीय व्यक्ति को बिना ठोस सबूत के अपमानित करना दोषपूर्ण है।
अदालत कैसे फैसला देगी?
असली मुजरिम तक कैसे पहुंचेगी
यही इस शार्ट फिल्म की कहानी है
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