प्रेमिका
म्हारी आखडल्यां री कोर , लागी बलमजी थारी ओर।
म्हने , काईं थे तरसाओ रे।
राज म्हारी मांग सजावो रे।
कांई तो तरसाओ ढोला कांई तरसाओ रे
प्रेमी
थोड़ी धीमी फेंको डोर
माली हालत छे कमजोर
रोजी रोटी ने जुटाऊं ये
गौरी मांग भी सजादेऊंलो ये ।।
घणा सुहावना सपणा देख्या
सतरंगी गणगौर।
बणी छूं थारी बीणणी जी
आंखडल्यां री कोर
थारी सुहागण मैं कहलाऊं रे
म्हाने कांईं तरसाओ रे
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