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Thursday, 4 June 2026

गीतकार संगीतकार हरिओम जोशी

   ग़ज़ल ::- शहर के लोग

हूँ अगर क़िस्मत से खाली , तंज कसते हैं सभी ।
मैं अजाबी हूँ खुदा या ये हैं मेरे शहर के लोग ।।

मेरे टूटे ख़्वाब इनको दे दिया करते सुकूँ ।
मेरी कश्ती ही डुबोने लगे मेरे शहर के लोग ।।

फिर भी तेरा शुक्रिया , तूने बनाया है मुझे
कामयाबी की झलक भी देखले ये शहर के लोग ।।

Saturday, 6 May 2023

मैं नशे में हूं। गीत संगीत हरिओम जोशी।

         मैं नशे में हूं।

मेरा कहा यक़ीन करो मैं नशे में हूं।
दीवाना इश्क़ में तेरे,  मैं नशे में हूं ।।

मानो नशे में रह कोई झूठ नहीं कहे ,
जो दिल में बात हो ज़ुबां से वही कहे ।
अब हो के तेरा आशिक तेरे नशे में हू ।।

 जामे शराब साकी आंखों से दी पिला ,  
जन्नत दिखा दी मुझको पैमाने में मिला ।
हुस्ने शबाब की कसम मैं नशे में हूं ।।

उन की निगाह में मेरा वजूद ना सही,  
एहसास मेरे इश्क़ का हो या ना,सही।
मुझको यकीं है यारा अब मैं नशे में हूं।।


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गीतकार संगीतकार हरिओम जोशी 
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Saturday, 22 April 2023

ज़माना छोड़ दूंगा मैं।

तुम्हारे प्यार की खातिर, ज़माना छोड़ दूंगा मैं।
मुहब्बत की कसम यारा जीना छोड़ दूंगा मैं।।


Sunday, 6 February 2022

तेरी याद है सताये। गीत संगीत हरिओम जोशी

                गीत संगीत हरिओम जोशी       
उउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउउ
        मुहब्बत की तड़प
ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्च्
देर ना करो अब वक़्त निकला जाये ।
मेरे हसीन दिलवर तेरी याद है सताये।।

है दिल की बेकरारी , पर तेरी बेखयाली।
कितना हसीं है मौसम यूं ही गुज़र ना जाये ।।

ये जान अब तुम्हारी मेरा सबकुछ है तुम्हारा ।
यूं ना तड़पता छोड़ो दम निकल ना जाये ।।

कैसे बताऊं तुमको कितनी मेरी है ख्वाहिश ।
लफ़्ज़ों से कहना मुश्किल तुमको समझ न आए ।।

तेरे मिलन की खातिर दुनिया को भी भुलाया ।
तेरी ये बेकद्री  मेरे दिल को क्यों सताये  ।।


Tuesday, 18 December 2018

जाने कहाँ गया ।

वो यादें जो हसीन थी जाने  कहाँ गयी ।

जो थी मेरा मुकद्दर जाने कहां गयी।। 

जिसकी मुहब्बत ने मुझको किया निहाल 

वो जो दिल में क़रीब था जाने कहाँ गया ।।

१.मुद्दतें हो गयी किसी ओर दिखता नहीं ।

वो  था जाँ नशीं जाँ मेरी ले गया  ।।

२.हर बात उसकी मेरी यादों में है 
दिल को चुरा के ना जाने कहाँ गया ।।

लगता नहीं है कोई उसके जैसा यहाँ ।
उसकी राह तकूं मैं जाने कहाँ गया ।।

Thursday, 29 November 2018

है कोई दिल में बसने को बेताब

         -:-   ग़ज़ल  -:-  गीत-संगीत हरिओम जोशी
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है कोई दिल में बसने को बेताब तो ।
आ ना जाना अभी थोडा़ रुकना ज़रा ।।

मेरी आँखों में हैं सपने बाक़ी क ई  ।
सच करलूँ दो ख्वाब अधूरे ज़रा  ।।

यूँ तो ख्वाहिश मेरी भी है दिलदार की ।
हैसियत को मैं अपनी बनालूँ ज़रा ।।

साथ चलना ही है हम क़दम उम्र भर ।
साथ चलने की नीयत बनालें ज़रा ।।

माना गहरी मुहब्बत है  मुझसे तुम्हें । 

दिल में बसने सी सूरत बसा लूॅं ज़रा ।।

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गीत-संगीत हरिओम जोशी  BOON WORLD OF MUSIC ACADEMY KOTA RAJASTHAN 

boonworldofmusic@gmail.com

8619027915

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